Param Pujya Madhav Gau Vigyan Anusandhan Sansthan

परम पूज्य माधव गौ विज्ञान अनुसंधान संस्थान

परम पूज्य माधव गौ विज्ञान अनुसंधान संस्थान

हमारे विचार

इतिहास गवाह ह, हमारे पूर्वजों ने कभी भी दूध, मक्खन, घी का व्यापार नहीं किया। नर गोवंश का उपयोग खेतों में एवं माल ढुलाई के लिए विशेष रूप से किया जाता था। गोवंश द्वारा प्राप्त दूध, दही, घी जो अपने उपयोग के बाद बचता था, हमारे पूर्वज समाज के लोगों में वितरित कर देते थे। गोमय (गोबर) एवं गोमूत्र का खेतों में उर्वरक एवं औषधि के रूप में उपयोग होता था।

आज के आधुनिक मशीनीकरण युग में गोवंश का उपयोग खेतों एवं माल ढुलाई में नहीं होने के कारण हमने दूध, मक्खन, घी का व्यापार करना शुरू कर दिया। इसके बावजूद भी गौ पालन किसानों को विशेष आर्थिक लाभ नहीं दे पा रहा है। पंचगव्य का सही उपयोग किया जाएगा तो यह समस्या दूर हो जाएगी । समस्या का समाधान कैसे किया जाय ? यह एक गहन चिन्तन का विषय है।

नर गोवंश आज हमारे लिए समस्या बन गए हैं। सर्दी, गर्मी, सूखा बर्दास्त करने वाले एवं शारीरिक रूप से मजबूत परन्तु कम दूध देने वाले गोवंश तथा नर गोवंश को हमने उपेक्षित कर दिया। आधुनिक युग में इनकी उपयोगिता को सिद्ध करना समय की जरूरत है। ये गोवंश ऊर्जा के एक अच्छे स्रोत हैं। इनके भारी वजन वाले शरीर तथा भारी वजन खींचने की क्षमता का उपयोग कैसे किया जा सकता है यह विज्ञानिकों के लिए शोध का विषय है। बैल चालित जनरेटर, गोबर से पेन्ट ;म्दंउमस चंपदजद्ध एवं कागज ;च्ंचमतद्ध बनाना इसके अच्छे उदाहरण हैं।

भारत में गोवंश को सदियों से माता का स्थान दिया गया है एवं इसकी पूजा करते आए हैं। इसके दूध को अमृत माना जाता रहा है। हमारी अंतरात्मा गोवंश उपभोग की अनुमति नहीं देती है।

समस्या का हल पंचगव्य एवं नर गोवंश में ही ढूॅंढना होगा। संस्थान इसी सोच को लेकर कार्यरत हैं। बैल चालित जनरेटर, गोबर गैस उत्पादन, गोबर गैस से मिथेन गैस को निकालना आदि प्रायोगिक संयंत्रों की स्थापना हमने अपने संस्थान में की है। किसानों के उत्थान के लिए संस्थान प्रतिबद्ध है। किसान उन्नति करेगा तभी देश उन्नति करेगा !

....